कभी-कभी थिएटर में बैठते ही समझ आ जाता है कि आज हल्की फिल्म नहीं देखने आए हो। O Romeo movie review लिखते समय मुझे सबसे पहले यही लगा कि यह फिल्म उन लोगों के लिए नहीं है जो सिर्फ टाइमपास चाहते हैं। यह फिल्म आराम से नहीं बैठती। यह धीरे धीरे आपके अंदर जगह बनाती ह और फिर आपको असहज छोड़ देती है।
विशाल भारद्वाज और शाहिद कपूर की जोड़ी जब भी साथ आती है, उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं। कमीने और हैदर के बाद O Romeo movie review in hindi को लेकर लोगों के मन में सवाल साफ था क्या यह फिर से वैसा असर छोड़ेगी या सिर्फ डार्क माहौल में उलझ जाएगी? जवाब सीधा नहीं है। लेकिन इतना साफ है कि यह फिल्म सुरक्षित खेलने नहीं आई।
O Romeo Details
| Movie Director | Vishal Bhardwaj |
| O Romeo Cast | Shahid Kapoor, Nana Patekar, Tripti Dimri |
| Language | Hindi |
| Running Time | 178 minutes |
| O Romeo Budget | est 125cr to 150cr |
O Romeo movie review in Hindi: कहानी क्या कहती है?
आज का हिंदी सिनेमा दो हिस्सों में बंटा दिखता है। एक तरफ बड़े बजट का चमकदार तमाशा। दूसरी तरफ सीमित लेकिन ठोस कहानी। O Romeo movie review करते समय यह समझना जरूरी है कि यह फिल्म दूसरी श्रेणी में आती है। यहां चमक कम है, लेकिन मिजाज गहरा है।
विशाल भारद्वाज का सिनेमा हमेशा नैतिक धुंध में चलता है। यहां भी हीरो पूरी तरह नायक नहीं है। वह हिंसा से भरा है, लेकिन अंदर कहीं टूटा हुआ भी है। O Romeo movie review में यह बात खास है कि फिल्म किसी को पूरी तरह अच्छा या बुरा नहीं बताती। हर किरदार अपने डर और लालच से संचालित होता है।
उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार शुरुआती O Romeo box office प्रतिक्रिया संतुलित रही है। भीड़ उतनी नहीं थी जितनी प्रचार के आधार पर हो सकती थी। लेकिन जो दर्शक फिल्म देखने पहुंचे, उनमें से कई ने इसे गंभीर अनुभव बताया। यह वह फिल्म नहीं है जो पहले वीकेंड में रिकॉर्ड तोड़ दे। यह धीरे-धीरे चर्चा में आने वाली फिल्म लगती है।
कहानी की असली चाल O Romeo story explained बिना खुलासा किए
अगर आप O Romeo story explained खोज रहे हैं तो यहां कहानी सीधी रेखा में नहीं चलती। यह गैंगलैंड की दुनिया में सेट है, जहां भरोसा सबसे महंगा सामान है। शाहिद कपूर का किरदार रोमियो नाम से जाना जाता है, लेकिन वह प्रेम का प्रतीक नहीं, बल्कि नियंत्रण का चेहरा है।
वह रिश्तों को समझता है, पर अपनाता नहीं। तृप्ति डिमरी का किरदार अफशा कहानी में बदलाव लाता है। शुरुआत में वह मदद मांगती हुई दिखती है, लेकिन धीरे-धीरे कहानी में उसका वजन बढ़ता जाता है।
O Romeo movie review में यह कहना जरूरी है कि पहला हिस्सा जानबूझकर धीमा है। यहां घटनाएं नहीं, माहौल बनाया जाता है। कैमरा लंबे शॉट्स में ठहरता है। संवाद कम हैं, नज़रें ज्यादा बोलती हैं।
दूसरे हिस्से में फिल्म का टोन बदलता है। हिंसा सामने आती है। लेकिन यह चमकदार हिंसा नहीं है। यह असहज करने वाली है। कुछ जगह लॉजिक पर सवाल उठते हैं। एक्शन के दौरान हीरो का बच निकलना कभी-कभी फिल्मी लगता है। O Romeo movie review को संतुलित रखते हुए यह स्वीकार करना पड़ेगा कि हर दृश्य पूरी तरह विश्वसनीय नहीं बैठता।
Shahid Kapoor ने O Romeo में ऐसा कमाल किया कि सोशल मीडिया थम गया
Shahid Kapoor की परफॉर्मेंस
O Romeo Shahid Kapoor ही इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। अगर फिल्म देखने के बाद कुछ याद रहता है, तो वो है उनका काम।
उनका किरदार बाहर से सख्त दिखता है, लेकिन अंदर से बिल्कुल थका हुआ है। यह थकान उनकी आंखों में साफ दिखती है। कई बार वो चुप रहते हैं, और वही चुप्पी दस डायलॉग से ज्यादा बोल जाती है। यह अभिनय शोर नहीं करता, यह सीधे दिल में उतरता है।
- तृप्ति डिमरी यहां सिर्फ हीरोइन नहीं हैं। उनका किरदार फिल्म के मूड को संभालता है। शुरू में जो नर्मी है, वो बाद में बदलती है और कहानी को आगे बढ़ाती है।
- नाना पाटेकर जब भी आते हैं, सीन भारी हो जाता है। कम समय में भी वो अपनी छाप छोड़ जाते हैं। अविनाश तिवारी भी फिट बैठते हैं। वो ज्यादा नहीं करते, लेकिन गलत भी नहीं करते।
अगर O Romeo rating सिर्फ अभिनय के आधार पर दी जाए, तो यह फिल्म आसानी से ऊंचे नंबर ले सकती है। हां, कहानी में कमियां हो सकती हैं, लेकिन कलाकारों ने पूरी मेहनत की है।
तो अगर आप Shahid Kapoor को एक अलग अंदाज में देखना चाहते हैं, तो O Romeo देख सकते हैं। यह उनकी अब तक की बेहतरीन परफॉर्मेंस में से एक है।
Vishal Bhardwaj की फिल्म की पहचान उसका माहौल है
कैमरा अंधेरे को सजावट की तरह नहीं, बल्कि एक किरदार की तरह इस्तेमाल करता है। फ्रेम अक्सर तंग हैं। गलियां संकरी हैं। रोशनी कम है। थिएटर में बैठे ये सब इतना करीब से महसूस हुआ कि लगा जैसे मैं भी उन्हीं गलियों में खड़ा हूं।
एडिटिंग पहले हाफ में जानबूझकर धीमी है। कुछ लोगों को यह खिंचाव लग सकता है। लेकिन अगर आप कहानी में उतरते हैं तो यह रफ्तार समझ में आती है। दूसरे हाफ में कट तेज हो जाते हैं।
आवाज़ पर काम कई जगह खास है। बैकग्राउंड का संगीत सीन को पकड़ता है, लेकिन बीच-बीच में गानों की भीड़ रफ्तार तोड़ती है। O Romeo movie review में यह मानना जरूरी है कि Music असरदार है, पर हर जगह कहानी को आगे नहीं बढ़ाता।
ठीक इसके उलट, संजय मिश्रा की Vadh 2 पूरी तरह बिना गानों के आगे बढ़ती है, जहाँ कहानी को कहीं रुकना नहीं पड़ता. Vadh 2 review में हमने इसी ताकत को समझा था।
O Romeo movie review में क्या सच में काम करता है
• शाहिद कपूर का संभला हुआ और गहराई वाला काम
• गैंगलैंड की वो दुनिया जो सच लगती है
• नैतिक उलझन जो कहानी को कई परतें देती है
• कुछ मोड़ जो अचानक नहीं, बल्कि धीरे धीरे खुलते हैं
इन्हीं वजहों से O Romeo movie review hindi सिर्फ अच्छी है बुरी है तक नहीं रुकता, बल्कि समझ बन जाता है।
कहां फिल्म थोड़ी लड़खड़ाती है
o romeo rating and review अगर सोच-समझकर दें तो यह 6.5 से 7 के बीच बैठती है। बिल्कुल सही नहीं, लेकिन दिमाग में रह जाने वाली। IMDB पर जाकर देखो तो वहां भी यही उधेड़बुन चल रही है लोग दे रहे हैं अपनी राय, बहस जारी है।
O Romeo देखने के बाद audience के मन में क्या रह जाता है?
O Romeo देखने के बाद लगा कि यह फिल्म तुरंत तालियां नहीं चाहती। यह धीरे असर करती है। थिएटर से बाहर निकला तो कुछ सवाल दिमाग में घूम रहे थे। बारिश में भीगने जैसा था पहले लगा अभी सूख जाऊंगा, पर घर पहुंचते तक ठंड शरीर में उतर चुकी थी।
अगर आप हल्का-फुल्का मनोरंजन चाहते हैं तो यह थोड़ी भारी लग सकती है। लेकिन अगर रिश्तों की उलझन और मन के अंदर चल रहे संघर्ष में दिलचस्पी है, तो यह फिल्म आपको बात करने के लिए बहुत कुछ देगी। मैंने अपने एक दोस्त से कहा – चल देखते हैं, उसने कहा कुछ समझ नहीं आया। मैंने कहा, यही तो बात है, समझ न आना ही इसकी समझ है।
अगर आप O Romeo movie review In Hindi में पढ़ रहे हैं तो शायद आप भी ऐसे ही किसी उधेड़बुन में हैं। और यही इस फिल्म की खूबसूरती है यह आपको साफ-साफ जवाब नहीं देती, बल्कि सवाल देकर जाती है।
Final Words – किसके लिए है यह फिल्म?
O Romeo movie review लिखते हुए सबसे मुश्किल काम है इसे खत्म करना। क्योंकि यह फिल्म सीधा जवाब नहीं देती। यह सवाल छोड़ जाती है।
फिल्म में हिम्मत है। हर दृश्य में कोशिश नजर आती है। हर जोखिम सफल नहीं हुआ, लेकिन कोशिश की गई है – यह साफ दिखता है। शाहिद कपूर ने मेहनत की है। विशाल भारद्वाज ने सोचा है।
यह वीकेंड की पॉपकॉर्न फिल्म नहीं है। यह वो फिल्म है जिसे आप रात में अकेले बैठकर देखेंगे, और सोने से पहले सोचेंगे।
अगर सिनेमा सिर्फ हंसाने-रुलाने के लिए नहीं है, अगर सिनेमा सवाल उठा सकता है, तो O Romeo उस रास्ते पर चलने की कोशिश करती है।
तो यह O Romeo किसे देखनी चाहिए?
अगर आपको लगता है कि फिल्म खत्म होने के बाद भी उसके किरदार आपके दिमाग में रहते हैं – तो यह फिल्म आपके लिए है।
अगर आप तृप्ति डिमरी को एक अलग अंदाज में देखना चाहते हैं, तो इंतजार मत कीजिए। वैसे अगले साल 2026 में उनकी एक नई फिल्म आ रही है Tripti Dimri new movie का इंतजार है, लेकिन O Romeo में उन्हें अभी देख सकते हैं।
अगर आप सोचते हैं कि फिल्म सिर्फ ढाई घंटे काटने का नाम है, तो शायद यह आपके लिए नहीं।
आपकी राय?
अगर आपने O Romeo देख ली है, तो नीचे कमेंट में बताइए कैसी लगी?
क्या आपको भी लगता है कि यह फिल्म समय के साथ और समझ में आएगी?
अपनी राय जरूर दें। और हां, अगर आपके दोस्तों में कोई है जो अच्छी फिल्मों की तलाश में रहता है, तो ये पोस्ट उसके साथ शेयर कर दीजिए।
Shahid Kapoor की बेस्ट फिल्म कौन सी है?
Shahid Kapoor की बेस्ट फिल्मों में Haider, Jab We Met, Kabir Singh और O Romeo का नाम लिया जा सकता है। हर फिल्म में उन्होंने अलग अंदाज दिखाया है।
O Romeo किस प्लेटफॉर्म पर है?
O Romeo अभी थिएटर में रिलीज हुई है। जल्द ही OTT पर आएगी। अपडेट के लिए सोशल मीडिया फॉलो करें।
O Romeo की रेटिंग क्या है?
अभिनय के लिहाज से देखें तो O Romeo rating 4/5 के करीब है। Shahid Kapoor अकेले पूरी फिल्म को संभाले हुए हैं। बाकी कलाकार भी अपनी जगह पर ठीक हैं।