अगर आपने वध का पहला पार्ट देखा है, तो ठीक। और अगर नहीं देखा, तब भी कोई परेशानी नहीं। थिएटर में बैठते वक्त मेरे दिमाग में यही बात सबसे पहले आई थी। सच कहूँ तो मुझे खुद नहीं पता था कि इस फिल्म से क्या उम्मीद रखूँ। नाम वही है, माहौल वही लगता है, लेकिन कहानी आगे बढ़ेगी या सिर्फ पुराने असर पर टिकेगी, यह साफ़ नहीं था।इसी असमंजस के साथ मैंने फिल्म देखनी शुरू की।
यही वजह है कि यह Vadh 2 review in Hindi मेरे लिए किसी तय राय से नहीं, बल्कि अनुभव से निकला हुआ रिव्यू है।पहले कुछ मिनटों में ही समझ आ जाता है कि फिल्म जल्दबाज़ी में कुछ साबित नहीं करना चाहती। यहां कोई ज़ोरदार डायलॉग्स नहीं हैं, कोई जबरदस्ती का बैकग्राउंड शोर नहीं। सब कुछ धीरे चलता है। शुरू में मुझे भी लगा कि फिल्म बहुत आराम से चल रही है, लेकिन थोड़ी देर बाद यह साफ़ हो गया कि यही इसका तरीका है। यही वजह है कि यह Vadh 2 movie review पहली नज़र में नहीं, धीरे-धीरे असर छोड़ता है।
Vadh 2 Movie Details
| Director | जसपाल सिंह संधू |
| Vadh 2 Cast | संजय मिश्रा, नीना गुप्ता |
| Running Time | 131 मिनट |
| Script Writer | जसपाल सिंह संधू , राहुल सेन |
कहानी क्या करती है, यह नहीं, कैसे आगे बढ़ती है, वही फर्क पैदा करता है
इस फिल्म में एक वध होता है। यह कोई छुपी हुई बात नहीं है। ट्रेलर से ही यह साफ़ कर दिया गया था। लेकिन असली खेल वहां शुरू होता है जहां यह तय नहीं होता कि असल में जिम्मेदार कौन है। फिल्म बार-बार आपकी सोच को एक दिशा में ले जाती है और फिर अगले सीन में वही सोच हिला देती Baki।पहले हाफ तक आप लगातार अंदाज़े लगाते रहते हैं। कभी लगता है जवाब सामने है, कभी लगता है सब कुछ दिखावा है। यही कन्फ्यूजन फिल्म की ताकत बन जाता है। मुझे यहां यह बात पसंद आई कि फिल्म दर्शक को बेवकूफ नहीं बनाती, बल्कि उसे सोचने का मौका देती है।
अगर कोई Vadh 2 story without spoilers ढूंढ रहा है, तो इतना समझ लेना काफी है कि यह कहानी अपराध से ज़्यादा उसके पीछे की बेचैनी और हालात पर टिकती है। जेल के भीतर का सेटअप पूरी फिल्म की रीढ़ है। इतनी सुरक्षा के बीच यह सब कैसे हुआ, यही सवाल आपको सीट से बांधे रखता है।
हाल की एक दूसरी थ्रिलर फिल्म Tu Yaa Main का ट्रेलर भी इसी तरह माहौल और अनकहे डर पर खेलता है, बिना ज़्यादा कुछ बताए।
संजय मिश्रा और नीना गुप्ता अकेले नहीं, पूरी कास्ट साथ चलती है
अक्सर ऐसी फिल्मों में सारा भार दो बड़े नामों पर डाल दिया जाता है। यहां ऐसा नहीं है। Sanjay Mishra Vadh 2 में किसी हीरो की तरह नहीं आते। वह एक ऐसे इंसान की तरह दिखते हैं जो बहुत कुछ देख चुका है और अब ज़्यादा बोलने के बजाय चुप रहना पसंद करता है। कई सीन में वह सिर्फ देखते हैं, और वही काफी होता है।
वहीं Neena Gupta Vadh 2 में धीरे-धीरे असर छोड़ती हैं। उनका किरदार अचानक सामने नहीं आता, बल्कि वक्त के साथ खुलता है। हालांकि, यहां एक बात मुझे खटकी। दोनों के बीच की पहचान और भरोसे को फिल्म थोड़ा हल्के में ले लेती है। कुछ जगह लगा कि अगर इसे थोड़ा और साफ़ दिखाया जाता, तो कहानी और मज़बूत होती।बाकी कलाकारों की बात करें तो कुमुद मिश्रा, शिल्पा शुक्ला और जांच से जुड़े चेहरे कहानी को आगे बढ़ाते हैं। कोई भी किरदार बेवजह नहीं लगता। पूरी फिल्म में Vadh 2 cast performance किसी एक चेहरे पर नहीं टिकी रहती, और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
जेल का माहौल, बिना गानों की कहानी और भागता हुआ वक्त
जेल का माहौल धीरे-धीरे आपके ऊपर चढ़ने लगता है। दीवारें, गलियारे, निगाहें — सब कुछ एक अजीब सा दबाव बनाता है। कई बार ऐसा लगता है कि अब कोई बड़ा खुलासा होगा, लेकिन फिल्म हर बार थोड़ा इंतज़ार करवाती है। यही वजह है कि यह फिल्म थिएटर में देखने के बाद भी दिमाग में चलती रहती है।
इसी दौरान कुछ चीज़ें बिना बोले अपना असर छोड़ती हैं:
- जेल की दीवारें सिर्फ जगह नहीं लगतीं, जैसे कहानी को और कस रही हों
- हर गलियारा और हर निगाह एक अलग तरह की बेचैनी पैदा करती है
- कई सीन में लगता है अब सच सामने आएगा, लेकिन फिल्म जानबूझकर रुक जाती है
- खामोशी कई बार डायलॉग से ज़्यादा भारी महसूस होती है
मुझे खास तौर पर यह बात अच्छी लगी कि फिल्म अपनी लंबाई को लेकर सजग है। सवा दो घंटे के आसपास की यह फिल्म खिंचती नहीं है। कहीं ऐसा नहीं लगा कि वक्त ज़बरदस्ती भरा जा रहा है।
आजकल ज़्यादातर फिल्मों में गाने ऐसे ठूंस दिए जाते हैं कि कहानी वहीं रुक जाती है। सीन चल रहा होता है, माहौल बन रहा होता है और अचानक गाना शुरू। लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं होता। Vadh 2 पूरी तरह बिना गानों के आगे बढ़ती है, और सच कहूं तो यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। कहानी को कहीं भी रुकना नहीं पड़ता, न भावनाओं को जबरदस्ती खींचा जाता है।जेल का माहौल धीरे-धीरे असर करता है।
शुरू में आप बस उसे देख रहे होते हैं, लेकिन कुछ देर बाद वही दीवारें, वही गलियारे और वही निगाहें आपको दबाने लगती हैं। ऐसा लगता है जैसे फिल्म आपको भी उसी जगह कैद कर रही हो। कई बार मन में आता है कि अब कोई बड़ा खुलासा होगा, अब सारा सच सामने आएगा। लेकिन फिल्म हर बार थोड़ा रुकती है, आपको इंतज़ार करवाती है।
यही इंतज़ार, यही बेचैनी इसे साधारण थ्रिलर से अलग बनाती है।मुझे पर्सनली यह बात काफी अच्छी लगी कि फिल्म अपनी लंबाई को लेकर ईमानदार है। सवा दो घंटे के आसपास की यह फिल्म खिंचती नहीं है। कहीं ऐसा महसूस नहीं होता कि वक्त सिर्फ पूरा करने के लिए सीन जोड़े गए हों। हर सीन का कोई न कोई मतलब है, चाहे वह छोटा हो या चुपचाप निकल जाए।
Amazon Prime की Daldal जैसी वेब सीरीज़ भी इसी तरह भारी माहौल और मानसिक दबाव के साथ आगे बढ़ती है, जहाँ शोर से ज़्यादा खामोशी असर करती है।
थिएटर से बाहर आने के बाद भी यह Vadh 2 theatre review दिमाग में इसलिए घूमता रहता है क्योंकि फिल्म खत्म होकर भी आपको तुरंत छोड़ती नहीं है। उसका असर धीरे-धीरे उतरता है, और शायद यही वजह है कि यह कहानी स्क्रीन से बाहर निकलकर भी पीछा करती रहती है।
निर्देशन और लिखावट, जहां फिल्म संभलती है और जहां थोड़ा रुकती है
अगर इस फिल्म को ध्यान से देखें, तो साफ दिखता है कि निर्देशक ने कहानी को शोर मचाने की बजाय धीरे खोलने का रास्ता चुना है। शुरुआत में जो सीन हल्के से निकल जाते हैं, वही बाद में जाकर अपनी अहमियत दिखाते हैं। यहां लिखावट सिर्फ माहौल बनाने के लिए नहीं है।
हर छोटी चीज़ कहीं न कहीं जुड़ती है। यही वजह है कि फिल्म देखने के बाद कई सीन दोबारा याद आते हैं और उनका मतलब बाद में समझ में आता है।डायरेक्शन का एक बड़ा प्लस यह है कि फिल्म दर्शक को जरूरत से ज्यादा समझाने की कोशिश नहीं करती। कैमरा रुकता है, बातचीत कम होती है, और कई बार चुप्पी ही कहानी को आगे बढ़ाती है।
मुझे लगा कि यह रिस्क लेना आसान नहीं होता, खासकर तब जब पूरी फिल्म एक बंद माहौल, यानी जेल के अंदर सेट हो। फिर भी, निर्देशक वहां भी कंट्रोल बनाए रखता है और चीज़ों को हाथ से निकलने नहीं देता।लेकिन यहां एक जगह फिल्म थोड़ी अटकती है। कुछ रिश्तों को लेकर सवाल उठते हैं, जिनके जवाब पूरी तरह नहीं मिलते। खासकर यह बात कि मदद इतनी सहजता से क्यों की जाती है, उस पर फिल्म ज्यादा वक्त नहीं देती।
मुझे यहां लगा कि अगर दो-चार सीन और जोड़े जाते, तो यह रिश्ता और साफ हो सकता था। ऐसा नहीं कि कहानी समझ में नहीं आती, लेकिन एक हल्की सी अधूरी कड़ी महसूस होती है।इसके बावजूद, यह कमी फिल्म के असर को कमजोर नहीं करती।
अगर कोई फिल्म को लेकर बुनियादी जानकारी देखना चाहता है, तो Vadh 2 IMDb प्रोफ़ाइल पर इसकी कास्ट और रिलीज़ से जुड़ी डिटेल्स मिल जाती हैं।
वजह यही है कि बाकी जगह लिखावट और निर्देशन इतना सधा हुआ है कि आप उस एक सवाल को लेकर फिल्म से दूर नहीं होते। इसी संतुलन की वजह से Vadh 2 review in hindi लिखते वक्त सिर्फ कमियां गिनाना आसान नहीं होता। फिल्म अपनी ईमानदारी और अपने चुने हुए रास्ते की वजह से आखिर तक आपको साथ लिए चलती है, और यही बात इसे आज की कई शोर भरी फिल्मों से अलग खड़ा करती है।
फिल्म खत्म होने के बाद जो साथ चलता है
फिल्म खत्म होने पर थिएटर में कोई शोर नहीं था। कोई ज़ोरदार तालियां नहीं। लोग चुपचाप उठ रहे थे। और शायद यही इस फिल्म की असली पहचान है। यह आपको तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर नहीं करती।मेरे लिए यह फिल्म कुछ देर तक दिमाग में चलती रही।
कौन सही था, कौन गलत, यह तय करना आसान नहीं था। यह Vadh 2 movie Hindi review लिखते समय मुझे बार-बार यही लगा कि फिल्म जवाब देने से ज़्यादा सवाल छोड़ने में भरोसा रखती है।मुझे पूरा यकीन है कि थिएटर में इसे सीमित दर्शक मिलेंगे, लेकिन ओटीटी पर यह फिल्म ज़्यादा लोगों तक पहुंचेगी।
यह उन फिल्मों में से है जिन्हें लोग धीरे-धीरे खोजते हैं और एक-दूसरे को बताते हैं।अगर आपको सस्पेंस पसंद है और आप ऐसी कहानी देखना चाहते हैं जो शोर मचाने की बजाय असर छोड़ती है, तो यह फिल्म एक मौका मांगती है। यह परफेक्ट नहीं है, लेकिन ईमानदार है। और आज के समय में शायद यही सबसे बड़ी बात है।
वध 2 के मुख्य कलाकार कौन हैं?
वध 2 में नाम बहुत ज़्यादा नहीं हैं, लेकिन जो हैं वही फिल्म को संभालते हैं। सबसे आगे संजय मिश्रा हैं, जिनके बिना यह कहानी चल ही नहीं सकती। उनके साथ नीना गुप्ता हैं, और दोनों का स्क्रीन पर होना ही फिल्म का टोन सेट कर देता है। इसके अलावा कुमुद मिश्रा, शिल्पा शुक्ला और अमित सिंह जैसे कलाकार हैं, जो भले कम दिखें, लेकिन जब आते हैं तो सीन खाली नहीं छोड़ते।
क्या वध 2, 2022 की फिल्म वध से जुड़ी है?
सीधे शब्दों में कहें तो वध 2, 2022 वाली वध की कहानी को आगे नहीं बढ़ाती। यह उसी दुनिया और उसी सोच से निकली हुई फिल्म है, लेकिन इसकी कहानी अलग है। पुराने किरदारों या घटनाओं को दोहराने की कोशिश नहीं की गई।बस इतना समझ लो कि अगर आपने पहली फिल्म नहीं भी देखी है, तो भी वध 2 समझने या महसूस करने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
क्या वध 2 ओटीटी (OTT) पर उपलब्ध है?
अब तक जो रिलीज़ प्लान है, वध 2 पहले थिएटर में रिलीज़ हुई है। इसका मतलब ये है कि अभी इसे सीधे किसी OTT प्लेटफॉर्म पर देखकर नहीं मिलेगा।जैसे ही फिल्म थिएटर रन पूरा कर लेगी, संभव है कि यह किसी प्रमुख OTT प्लेटफ़ॉर्म पर आए — लेकिन अभी official release की पुष्टि किसी service (जैसे Netflix, Prime Video, Disney+ Hotstar, Zee5) पर नहीं हुई है।